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बक्सर में सुकन्या योजना के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 80 महिलाओं के खातों से करोड़ों का लेनदेन

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बक्सर में सुकन्या योजना के नाम पर महिलाओं को झांसा देकर उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का मामला सामने आया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

बक्सर/आलम की खबर:बिहार के बक्सर जिले से साइबर ठगी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सुकन्या समृद्धि योजना के नाम पर महिलाओं और लड़कियों को झांसा देकर उनके बैंक खातों का दुरुपयोग किया गया और करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। धनसोई थाना क्षेत्र में उजागर हुए इस मामले ने न केवल ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह साइबर अपराधी योजनाओं के नाम पर भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी ममता कुमारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला गांव-गांव जाकर महिलाओं और उनके परिवारों को सरकारी योजना के नाम पर प्रलोभन देती थी और दावा करती थी कि बेटियों की शादी के समय उन्हें आर्थिक सहायता और अन्य सामान उपलब्ध कराया जाएगा। इस झांसे में आकर कई महिलाओं ने अपने नाम पर बैंक खाते खुलवा लिए, जिन्हें जीरो बैलेंस खाते के रूप में संचालित किया गया।

इसके बाद आरोपी ने चालाकी से इन खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने पास रख लिए, जिससे खातों पर पूरा नियंत्रण उसी के हाथ में चला गया। ग्रामीणों को इस बात का अंदाजा तक नहीं हुआ कि उनके नाम पर खोले गए खाते किसी बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं।

80 खातों से करोड़ों का लेनदेन

जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि लगभग 80 महिलाओं के नाम पर खोले गए खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। यह रकम विभिन्न साइबर ठगी के मामलों से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर एटीएम के माध्यम से निकाल लिया जाता था।

इस पूरे नेटवर्क में इन खातों का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के रूप में किया जा रहा था, यानी ऐसे खाते जिनका उपयोग केवल पैसे के ट्रांजेक्शन और निकासी के लिए किया जाता है, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके।

साइबर गिरोह से जुड़ा था पूरा नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित साइबर गिरोह के सक्रिय होने की आशंका है। आरोपी महिला इन खातों को तैयार कर साइबर अपराधियों को सौंप देती थी, जो इनका इस्तेमाल देश के विभिन्न हिस्सों में ठगी के लिए करते थे।

सिम कार्ड के माध्यम से लोगों को कॉल या मैसेज कर ठगी की जाती थी और ठगे गए पैसे को इन्हीं खातों में डालकर तुरंत निकाल लिया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता था।

नोटिस मिलने पर खुला मामला

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब जिन महिलाओं के नाम पर खाते खोले गए थे, उन्हें अन्य जिलों से साइबर अपराध से जुड़े नोटिस मिलने लगे। अचानक इस तरह के नोटिस मिलने से महिलाएं और उनके परिवार घबरा गए और उन्होंने स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी दी।

इसके बाद ग्रामीणों को शक हुआ और उन्होंने आरोपी महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया और साइबर पुलिस की टीम को सौंप दिया।

पुलिस की टीम ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की है। डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक और अन्य अधिकारियों की टीम बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है और पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

एक और आरोपी की तलाश जारी

जांच के दौरान एक अन्य महिला की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसे इस मामले में नामजद किया गया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए सभी आरोपियों की गिरफ्तारी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

साइबर ठगी को लेकर बढ़ती चिंता

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब ग्रामीण इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी योजना के नाम पर यदि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत दस्तावेज या बैंक से जुड़ी जानकारी मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।

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